वन पर्व  अध्याय १८६

मार्कण्डेय़ उवाच

ततो मामव्रवीद्वीर स वालः प्रहसन्निव |  ११६   क
श्रीवत्सधारी द्युतिमान्पीतवासा महाद्युतिः ||  ११६   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति