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अनुशासन पर्व
अध्याय २०
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भीष्म उवाच
अशोके विमले तीर्थे स्नात्वा तर्प्य च देवताः |  ४   क
तत्र वासाय़ शय़ने कौश्ये सुखमुवास ह ||  ४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति