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वन पर्व
अध्याय १८६
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मार्कण्डेय़ उवाच
यथर्तुवर्षी भगवान्न तथा पाकशासनः |  ४४   क
न तदा सर्ववीजानि सम्यग्रोहन्ति भारत |  ४४   ख
अधर्मफलमत्यर्थं तदा भवति चानघ ||  ४४   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति