menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
वन पर्व
अध्याय १८६
chevron_left
chevron_right
मार्कण्डेय़ उवाच
अधर्मिष्ठैरुपाय़ैश्च प्रजा व्यवहरन्त्युत |  ४९   क
सञ्चय़ेनापि चाल्पेन भवन्त्याढ्या मदान्विताः ||  ४९   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति