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वन पर्व
अध्याय ११३
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लोमश उवाच
सम्प्राप्य सत्कारमतीव तेभ्यः; प्रोवाच कस्य प्रथिताः स्थ सौम्याः |  १७   क
ऊचुस्ततस्तेऽभ्युपगम्य सर्वे; धनं तवेदं विहितं सुतस्य ||  १७   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति