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शान्ति पर्व
अध्याय १८७
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भीष्म उवाच
गुणान्नेनीय़ते वुद्धिर्वुद्धिरेवेन्द्रिय़ाण्यपि |  १६   क
मनःषष्ठानि सर्वाणि वुद्ध्यभावे कुतो गुणाः ||  १६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति