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शान्ति पर्व
अध्याय १८७
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भीष्म उवाच
त्रिविधा वेदना चैव सर्वसत्त्वेषु दृश्यते |  २८   क
सात्त्विकी राजसी चैव तामसी चेति भारत ||  २८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति