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शान्ति पर्व
अध्याय १८७
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भीष्म उवाच
प्रहर्षः प्रीतिरानन्दः सुखं संशान्तचित्तता |  ३३   क
कथञ्चिदभिवर्तन्त इत्येते सात्त्विका गुणाः ||  ३३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति