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शान्ति पर्व
अध्याय १८७
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भीष्म उवाच
सत्त्वक्षेत्रज्ञय़ोरेतदन्तरं पश्य सूक्ष्मय़ोः |  ३७   क
सृजते तु गुणानेक एको न सृजते गुणान् ||  ३७   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति