शान्ति पर्व  अध्याय ३२८

श्रीभगवानु उवाच

नमस्व हव्यदं विष्णुं तथा शरणदं नम |  २९   क
वरदं नमस्व कौन्तेय़ हव्यकव्यभुजं नम ||  २९   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति