उद्योग पर्व  अध्याय १०१

कण्व उवाच

ततोऽव्रवीत्प्रीतमना मातलिर्नारदं वचः |  २५   क
एष मे रुचितस्तात जामाता भुजगोत्तमः ||  २५   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति