उद्योग पर्व  अध्याय १८७

भीष्म उवाच

नन्दाश्रमे महाराज ततोलूकाश्रमे शुभे |  २५   क
च्यवनस्याश्रमे चैव व्रह्मणः स्थान एव च ||  २५   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति