उद्योग पर्व  अध्याय १८७

भीष्म उवाच

माण्डव्यस्याश्रमे राजन्दिलीपस्याश्रमे तथा |  २७   क
रामह्रदे च कौरव्य पैलगार्ग्यस्य चाश्रमे ||  २७   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति