उद्योग पर्व  अध्याय १८७

भीष्म उवाच

कदाचिदष्टमे मासि कदाचिद्दशमे तथा |  ३७   क
न प्राश्नीतोदकमपि पुनः सा वरवर्णिनी ||  ३७   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति