आदि पर्व  अध्याय १८८

व्यास उवाच

अनृतान्मोक्ष्यसे भद्रे धर्मश्चैष सनातनः |  १८   क
न तु वक्ष्यामि सर्वेषां पाञ्चाल शृणु मे स्वय़म् ||  १८   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति