आदि पर्व  अध्याय १८८

वैशम्पाय़न उवाच

ततो द्वैपाय़नस्तस्मै नरेन्द्राय़ महात्मने |  २२   क
आचख्यौ तद्यथा धर्मो वहूनामेकपत्निता ||  २२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति