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शान्ति पर्व
अध्याय १८८
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भीष्म उवाच
नावर्तन्ते पुनः पार्थ मुक्ताः संसारदोषतः |  ३   क
जन्मदोषपरिक्षीणाः स्वभावे पर्यवस्थिताः ||  ३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति