menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
शल्य पर्व
अध्याय २२
chevron_left
chevron_right
सञ्जय़ उवाच
उपारमन्त ज्याशव्दाः प्रेक्षका रथिनोऽभवन् |  ४२   क
न हि स्वेषां परेषां वा विशेषः प्रत्यदृश्यत ||  ४२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति