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अनुशासन पर्व
अध्याय १२४
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भीष्म उवाच
प्रवासं यदि मे भर्ता याति कार्येण केनचित् |  १६   क
मङ्गलैर्वहुभिर्युक्ता भवामि निय़ता सदा ||  १६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति