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शान्ति पर्व
अध्याय ११२
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भीष्म उवाच
व्युत्थानं चात्र काङ्क्षद्भिः कथाभिः प्रविलोभ्यते |  ४३   क
धनेन महता चैव वुद्धिरस्य विलोभ्यते ||  ४३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति