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शल्य पर्व
अध्याय ५५
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सञ्जय़ उवाच
अद्याय़ं कुरुराजस्य शन्तनोः कुलपांसनः |  २४   क
प्राणाञ्श्रिय़ं च राज्यं च त्यक्त्वा शेष्यति भूतले ||  २४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति