उद्योग पर्व  अध्याय १८९

दुर्योधन उवाच

कथं शिखण्डी गाङ्गेय़ कन्या भूत्वा सती तदा |  १   क
पुरुषोऽभवद्युधि श्रेष्ठ तन्मे व्रूहि पितामह ||  १   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति