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भीष्म पर्व
अध्याय ५०
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सञ्जय़ उवाच
भीष्मस्तु निहते तस्मिन्सारथौ रथिनां वरः |  १०६   क
वाताय़मानैस्तैरश्वैरपनीतो रणाजिरात् ||  १०६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति