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आश्वमेधिक पर्व
अध्याय १९
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व्राह्मण उवाच
सर्वमित्रः सर्वसहः समरक्तो जितेन्द्रिय़ः |  २   क
व्यपेतभय़मन्युश्च कामहा मुच्यते नरः ||  २   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति