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आश्वमेधिक पर्व
अध्याय १९
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व्राह्मण उवाच
आत्मवत्सर्वभूतेषु यश्चरेन्निय़तः शुचिः |  ३   क
अमानी निरभीमानः सर्वतो मुक्त एव सः ||  ३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति