आश्वमेधिक पर्व  अध्याय १९

व्राह्मण उवाच

स तदुत्सृज्य देहं स्वं धारय़न्व्रह्म केवलम् |  ४६   क
आत्मानमालोकय़ति मनसा प्रहसन्निव ||  ४६   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति