आश्वमेधिक पर्व  अध्याय १९

वासुदेव उवाच

एवं हि धर्ममास्थाय़ येऽपि स्युः पापय़ोनय़ः |  ५६   क
स्त्रिय़ो वैश्यास्तथा शूद्रास्तेऽपि यान्ति परां गतिम् ||  ५६   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति