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भीष्म पर्व
अध्याय ३३
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श्रीभगवानु उवाच
तस्मात्त्वमुत्तिष्ठ यशो लभस्व; जित्वा शत्रून्भुङ्क्ष्व राज्यं समृद्धम् |  ३३   क
मय़ैवैते निहताः पूर्वमेव; निमित्तमात्रं भव सव्यसाचिन् ||  ३३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति