वन पर्व  अध्याय २९१

वैशम्पाय़न उवाच

न शशाक यदा वाला प्रत्याख्यातुं तमोनुदम् |  २   क
भीता शापात्ततो राजन्दध्यौ दीर्घमथान्तरम् ||  २   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति