वन पर्व  अध्याय १९

वासुदेव उवाच

एवं व्रुवति सूते तु तदा मकरकेतुमान् |  ११   क
उवाच सूतं कौरव्य निवर्तय़ रथं पुनः ||  ११   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति