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शान्ति पर्व
अध्याय २५२
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युधिष्ठिर उवाच
इमानि हि प्रापय़न्ति सृजन्त्युत्तारय़न्ति च |  ३   क
न धर्मः परिपाठेन शक्यो भारत वेदितुम् ||  ३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति