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वन पर्व
अध्याय १९
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वासुदेव उवाच
शूरं सम्भावितं सन्तं नित्यं पुरुषमानिनम् |  २१   क
स्त्रिय़श्च वृष्णीवीराणां किं मां वक्ष्यन्ति सङ्गताः ||  २१   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति