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विराट पर्व
अध्याय १९
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वैशम्पाय़न उवाच
तौ गृहीत्वा च कौन्तेय़ो वाष्पमुत्सृज्य वीर्यवान् |  ३०   क
ततः परमदुःखार्त इदं वचनमव्रवीत् ||  ३०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति