विराट पर्व  अध्याय २३

वैशम्पाय़न उवाच

त्रासितेव मृगी वाला शार्दूलेन मनस्विनी |  १२   क
गात्राणि वाससी चैव प्रक्षाल्य सलिलेन सा ||  १२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति