आदि पर्व  अध्याय ८६

यय़ातिरु उवाच

दशैव पूर्वान्दश चापरांस्तु; ज्ञातीन्सहात्मानमथैकविंशम् |  ७   क
अरण्यवासी सुकृते दधाति; विमुच्यारण्ये स्वशरीरधातून् ||  ७   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति