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कर्ण पर्व
अध्याय ४
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सञ्जय़ उवाच
एतैश्च मुख्यैरपरैश्च राज; न्योधप्रवीरैरमितप्रभावैः |  १०५   क
व्यवस्थितो नागकुलस्य मध्ये; यथा महेन्द्रः कुरुराजो जय़ाय़ ||  १०५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति