द्रोण पर्व  अध्याय १९

सञ्जय़ उवाच

नरानेव नरा जघ्नुरुदग्राश्च हय़ा हय़ान् |  ३७   क
रथांश्च रथिनो जघ्नुर्वारणा वरवारणान् ||  ३७   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति