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द्रोण पर्व
अध्याय १९
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सञ्जय़ उवाच
तेषां शैलोपमैः काय़ैर्निपतद्भिः समन्ततः |  ५०   क
आहता सहसा भूमिश्चकम्पे च ननाद च ||  ५०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति