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कर्ण पर्व
अध्याय १९
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सञ्जय़ उवाच
विष्वक्सेनं तु निर्भिन्नं प्रेक्ष्य पार्थो धनञ्जय़ः |  १६   क
सत्यसेनं शरैस्तीक्ष्णैर्दारय़ित्वा महावलः ||  १६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति