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कर्ण पर्व
अध्याय १९
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सञ्जय़ उवाच
रथं नागाः समासाद्य धुरि गृह्य च मारिष |  ६०   क
व्याक्षिपन्सहसा तत्र घोररूपे महामृधे ||  ६०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति