वन पर्व  अध्याय १९०

वैशम्पाय़न उवाच

यो मय़ार्थी स मृतकैर्मण्डूकैरुपाय़नैर्मामुपतिष्ठेदिति ||  ३०   क
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति