वन पर्व  अध्याय १९०

वैशम्पाय़न उवाच

यदि पर्याप्तं निर्यातय़ोपाध्याय़वाम्याविति ||  ५५   क
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति