आदि पर्व  अध्याय १९१

वैशम्पाय़न उवाच

जीवसूर्वीरसूर्भद्रे वहुसौख्यसमन्विता |  ७   क
सुभगा भोगसम्पन्ना यज्ञपत्नी स्वनुव्रता ||  ७   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति