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द्रोण पर्व
अध्याय ५७
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सञ्जय़ उवाच
मन्दरस्य प्रदेशांश्च किंनरोद्गीतनादितान् |  २६   क
हेमरूप्यमय़ैः शृङ्गैर्नानौषधिविदीपितान् |  २६   ख
तथा मन्दारवृक्षैश्च पुष्पितैरुपशोभितान् ||  २६   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति