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शल्य पर्व
अध्याय २
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वैशम्पाय़न उवाच
एते चान्ये च वहवो राजानो राजसत्तम |  २१   क
मदर्थमुद्यताः सर्वे प्राणांस्त्यक्त्वा रणे प्रभो ||  २१   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति