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शान्ति पर्व
अध्याय २८४
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पराशर उवाच
कृतार्थो भोगतो भूत्वा स वै रतिपराय़णः |  ६   क
लाभं ग्राम्यसुखादन्यं रतितो नानुपश्यति ||  ६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति