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शान्ति पर्व
अध्याय १९२
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भीष्म उवाच
अमृताच्चामृतं प्राप्तः शीतीभूतो निरात्मवान् |  १२२   क
व्रह्मभूतः स निर्द्वन्द्वः सुखी शान्तो निरामय़ः ||  १२२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति