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शान्ति पर्व
अध्याय १९२
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भीष्म उवाच
अथ वा वीक्षते लोकान्सर्वान्निरय़संस्थितान् |  १२६   क
निःस्पृहः सर्वतो मुक्तस्तत्रैव रमते सुखी ||  १२६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति