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आदि पर्व
अध्याय १५५
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व्राह्मण उवाच
यद्वा तेऽन्यद्द्विजश्रेष्ठ मनसः सुप्रिय़ं भवेत् |  १२   क
सर्वं तत्ते प्रदाताहं न हि मेऽस्त्यत्र संशय़ः ||  १२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति