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शान्ति पर्व
अध्याय १९२
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भीष्म उवाच
व्राह्मणो जापकः कश्चिद्धर्मवृत्तो महाय़शाः |  ४   क
षडङ्गविन्महाप्राज्ञः पैप्पलादिः स कौशिकः ||  ४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति